Tuesday, 5 June 2018

शहर की सेहत बिगाड़ रही है पॉलीथीन


प्रदेश सरकार द्वारा अध्यादेश लागू कर पॉलीथिन के प्रयोग और निर्माण पर रोक लगाने के बावजूद शहर में इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। मुख्य बाजार, गली-मोहल्लों में दुकानदार से लेकर रेहडी पटरी पर सामान पॉलीथिन में दिया जा रहा है। लोगों द्वारा प्रयोग के बाद पॉलीथिन फेंकने से पॉलीथिन कूड़े के ढेर में तब्दील होकर शहर के सीवर, नालों की नब्ज रोक देती है। जबकि कुछ लोगों द्वारा अनजाने में कूड़े के ढ़ेर में आग लगाने से यह पर्यावरण को दूषित कर रही हैं। सरकार द्वारा कानून बनाने के बाद भी प्रशासन पॉलीथिन की बिक्री रोकने में फेल साबित हो रहा है। पॉलीथिन मानव के साथ शहर की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है। मानसून आने को है और शहर के नाले पॉलीथिन से अटे पड़े है। नगरपालिका के लिए पॉलीथिन मुसीबत बनी हुई है। शहर में कोई डंपिंग ग्राउंड नहीं होना नगरपालिका के गले की फांस बना हुआ है,क्योंकि नालों की सफाई होने पर बड़ी संख्या में पॉलीथीन निकलती हैं। कूड़ों के ढ़ेर में पड़ी पॉलीथिन मानव ही नहीं पशुओं के लिए नुकसान दायक साबित हो रही हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बिजेंद्र त्यागी ने बताया कि शहर में आवारा पशुओं के पेट में पॉलीथिन निकलती हैं। इससे पशुओं को गंभीर बीमारी पैदा हो रही है और हर वर्ष करीब पांच सौ आवारा पशुओं की मौत पॉलीथिन के कारण ही हो रही हैं। पॉलीथिन के अवैध धंधे पर प्रसाशन नरम : जिले में शहरों से लेकर गांवों तक पॉलीथीन का खुला प्रयोग हो रहा है, लेकिन प्रशासन ने धड़ल्ले से हो रहे अवैध धंधे से आंख मूंद रखी हैं। हालात यह है कि शहर कोतवाली के सामने ठेले वाले बेखौफ पॉलीथिन अपने ठेले पर रखकर बैठे हैं और पॉलीथिन में सामान बेचे रहे हैं।

मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है पॉलीथिन पॉलीथिन के कचरे से शहर में हर साल सैकड़ों पशु-पक्षियों की मौत हो रही है। इसका बढ़ता प्रयोग लोगों में नई-नई बीमारियां पैदा कर रहा है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है, साथ ही भूगर्भीय जल भी दूषित हो रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि प्लास्टिक में प्रयोग होने वाले बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज और लीवर इंजाइम को असामान्य कर देता है। पॉलीथिन का कचरा जलने से कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और डाई ऑक्सीजन जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस त्वचा आदि की बीमारी बढ़ रही है।--क्या कहते है लोग :पॉलीथिन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है इस बात की जानकारी तो है, लेकिन बाजार से सामान लाने में आसानी होती है। इसकी आसानी से उपलब्धता भी इसके प्रयोग को बढ़ावा दे रही है। प्रशासन इसका प्रयोग पूर्णतया करा दे तो शायद इससे छुटकारा जल्दी मिल जाएगा।
हरेंद्र त्यागी शहर में कूड़े के ढ़ेर से लेकर सीवर, नालों में पॉलीथिन अटी पड़ी है। इससे न तो सही से सफाई हो रही है और सफाई हो भी जाती है तो नालियों से निकली पॉलीथिन इधर-उधर पड़ी रहती हैं। प्रशासन को पॉलीथीन का प्रयोग रोकने के साथ जागरूकता कार्यक्रम भी चलाने चाहिए।
by-livehindustan

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